संवाददाता “आरती पांडे”
“एक तरफ है पढ़ाई का बोझ
दूसरी तरफ है हर नए वायरस की खोज
जिसने किया बच्चों पर भरमार
मचा दिया कोरोना ने हाहाकार”
कोरोना भली-भांति परिचित नाम जिसको हर कोई जानता है अच्छी तरह पहचानता है. सन 2019 में चाइना के वोहान से जन्मा यह वायरस जो आज गली-गली नए नामों से घूम रहा है. आज भारत में इस पर विजय प्राप्त कर ली हो परंतु अब एक नए वैरीअंट का सामना करने भारत फिर खड़ा है. जिसकी असल वजह है-“चीन“…आज भले ही चीन ने जो कुछ भी किया है. वह खुद भी भुगत रहा है, परंतु इसका पूरा खामियाजा यह पूरा विश्व उसके साथ ही भुगत रहा है. हम कैसे भूल सकते हैं वह 2020 का दौर याद है—– आप सभी को 2020 में कितनी जाने गई है. जितमें ज्यादातर जो लोग हैं वह पुरुष हैं. पुरुषों की संख्या 40.69 प्रतिशत रही है, वही टोटल मरने वालों की संख्या 90% तक रही है, तो आप सोच सकते हैं कि इस कोरोना ने कितनी अफरा-तफरी मचा कर रख दी है. कुछ लोग उस समय डिप्रेशन का शिकार हुए थे. कुछ लोग नौकरी ना होने की वजह से फांसी पर लटक गए थे. आज फिर एक नया वैरीअंट BF-7 हमारे सामने खड़ा है जिसके लिए भारत कितना तैयार है यह तो अब आने वाला 2023 ही बता पाएगा…….
क्या फिर से एग्जाम होंगे पोस्टपोन
जिस तरीके से लगातार फिर से कोरोना के दूसरे नए वैरीअंट ने अपने पैर भारत में जमाने शुरू कर दिए हैं और आए दिन आंकड़ा 3000 से 4000 तक पहुंच चुका है. तो ऐसा लग रहा है कि अब 2023 में एग्जाम का पोस्टपोन होना तय है, फिलहाल यह तो आंकड़े ही बता पाएंगे क्या होता है. परंतु अब इसका प्रेशर छात्रों के ऊपर पड़ रहा है-छात्रों पर ही नहीं यूथ पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, यह बात बिल्कुल सच है कि आज का युवा सरकारी नौकरी की तैयारी में लगा हुआ है. जिस वजह से वह हर साल या कहे हर महीने सरकारी नौकरी की वैकेंसी का इंतजार करता रहता है. पर जब इस तरीके के वायरस लगातार इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं तो वह यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि वह इस एग्जाम की तैयारी करें या ना करें जिस वजह से वह डिप्रेशन का शिकार भी होता जा रहा है.
