जोशीमठ – हाल ही में नए साल की शुरुआत लगते ही “जोशीमठ” के घरों और मकान दरकने शुरू हो गए हैं. दरअसल, इसकी असल वजह क्या है इसका पता तो भू-वैज्ञानिक ही लगा पाएंगे. परंतु हम आपको यह बता दें, कि यह वही जमीन है जो “गौरा देवी” के नाम से विश्व प्रख्यात रह चुकी है और यह जमीन दरकना शुरू हो गई है.
बता दे, यह भूधँसाव इस कदर हो रहा है कि जोशीमठ के कस्बे के कई इलाकों में घरों की दीवारें बड़ी-बड़ी दीवारे में दरारें पड़ चुकी हैं. जिसके अंदर 576 परिवार आते हैं, जो कि अपने घरों को भी छोड़ चुके हैं. वही कस्बे की सड़कों पर भी दरारें पड़ चुकी हैं, कई जगहों पर दरारों की वजह से पानी की मोटी धार निकल रही है और लोगों को एक बड़ी अनहोनी होने की आशंका भी सता रही है. वैसे तो 80 के दशक में भी इसी कस्बे में आज की तुलना में बहुत छोटे से भूधँसाव पर तत्कालीन सरकार ने तत्कालीन आयुक्त मंडल महेश चंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में 1976 को एक समिति गठित की थी. जिसने क्षेत्र का सर्वेक्षण भी किया था और 1 महीने के अंदर जिला मुख्यालय गोपेश्वर में बैठक कर जांच समिति का गठन किया था. जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि जोशीमठ का कस्बा भूगर्भीय दृष्टि से बड़े निर्माण के लिए सही नहीं है अतः यहां बड़े निर्माण नहीं किए जाने चाहिए अगर यह होता है तो बाद में ऐसी दिक्कत आ सकती है जो आज देखने को मिल रही है.
जिसके चलते शुक्रवार को सीएम धामी ने शाम को जोशीमठ विषय पर एक आपात बैठक बुलाई. जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ शासन प्रशासन और विशेषज्ञ भी बुलाए गए हैं. अब देखना यह होगा कि भू-वैज्ञानिकों का क्या कहना है कि यह जमीन क्यों खिसक रही है.
