देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार द्वारा बनाए गए देवस्थाम बोर्ड का अब विरोध बहुत तेज हो गया है। तीर्थपुरोहितों में रोष बढ़ता जा रहा है, ऐसे में सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्व राज्यसभा सदस्य मनोहर कांत ध्यानी की अध्यक्षता में एक समिति बना दी है जो इस विषय पर निर्णय लेगी।
त्रिवेंद्र सरकार ने वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर चार धाम सहित कुल 54 मंदिरों की विकास संबंधी योजनाओं को लागू करने के लिए देवस्थानम बोर्ड त्रिवेन्द्र सरकार ने बनाया, उसके बाद तीरथ रावत मुख्यमंत्री बने जिसके बाद तीरथ सरकार ने इसे स्थिगित कर दिया किन्तु पुनः इसे आरम्भ भी कर दिया। पुरोहितो द्वारा विरोध अत्यधिक बढ़ता चला गया और अब पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद तीर्थ पुरोहितो की उम्मीदें बढ़ी है और विरोध भी जोर पकड़ गया है।
ऐसे में सूत्रों के अनुसार अब विरोध के चलते तीर्थ पुरोहित सरकार के प्रतिनिधियों को अपने मंदिरों की तरफ नही आने दे रहे।
स्थिति को दखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य मनोहर कांत ध्यानी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर इस मसले का समाधान ढूंढने के निवेदन किया है । उन्होने कहा कि देवस्थानम बोर्ड से सक्रिय रहने से तीर्थ पुरोहितों के किसी हित का नुकसान नही होने दिया जाएगा ,दरअसल इस बोर्ड के माध्यम से देवस्थलों के विकास में जनसहयोग मिलेगा। फिर भी कोई संदेह है तो सरकार इसे दूर करेगी।
किन्तु तीर्थ पुरोहित समाज का साफ़ कहना है कि पहले देवस्थानम बोर्ड को सरकार समाप्त करिये तब बात होगी ।
देवस्थानम बोर्ड को समाप्त करे सरकार – तीर्थ पुरोहित, विरोध हुआ तेज
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