उत्तराखंड में लगातार आते हुए भूकंप पर कुछ नई बातें सामने आई हैं, पेश है रिपोर्ट..

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संवाददाता “आरती पांडे” की रिपोर्ट..

देहरादून – उत्तराखंड में वैसे तो भू-वैज्ञानिकों ने आने वाले समय में एक बड़े भूकंप के आने की चेतावनी दे रखी है. परंतु आज जो रिपोर्ट हम आपके साथ साझा करेंगे. वह रिपोर्ट इन सब तथ्यों से हटकर कुछ अलग बात कह रही है. जी हां, इन तथ्यों को आप गौर से पढ़िएगा क्योंकि तब आपको पता चलेगा कि किस तरीके से जो भूकंप उत्तराखंड में लगातार आ रहा है और इसकी असल वजह क्या है…

इस रिपोर्ट में आपको बता दें, हिंदूकुश रीजन में अक्सर भूकंप की गहराई अधिक रहती है. इससे नुकसान कम होता है बाकी अगर यह भूकंप मध्य हिमालय क्षेत्र की बजाए हिमालय के दूसरे हिस्से में आता है, तो यहां पर भारी नुकसान हो सकता है. भले ही वह भूकंप 6.6 तीव्रता का ही क्यों ना हो… बाकी मध्य एवं पूर्वी हिमालय क्षेत्र में भूकंप की गहराई कम रहने से नुकसान कहीं ज्यादा हो जाता है.

वैसे तो देहरादून के वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों का आंकलन कुछ यह बताता है की हिंदूकुश रीजन में भूकंप की गहराई लगभग 150 से 180 किलोमीटर रहती है. बाकी हिमालयन रीजन में इसकी गहराई 10 से 50 किलोमीटर तक ही रहती है. जिस पर वैज्ञानिक डॉक्टर नरेश कुमार का कहना है कि जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल तक ऐसा भूकंप आया होता तो यहां भीषण आपदा का सामना करना पड़ेगा. यहां के भूकंप में भूगर्भीय वजहों से अधिक गहराई नहीं होती है. उत्तराखंड के चमोली में साल 1999 में 6.5 तीव्रता भूकंप देखा गया था जिससे भारी नुकसान पहुंचा था. वही सिक्किम में साल 2011 में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था. जिसकी गहराई सिर्फ 40 किलोमीटर की है. बता दें, इससे यह पता चलता है कि हिंदूकुश हिमालय ही एकमात्र ऐसी शाखा है, जो उतरी पाकिस्तान के मध्य अफगानिस्तान तक फैली हुई है. लेकिन इसकी भूगर्भीय संरचना हिमालय रीजन से अलग है. यही वजह है कि यहां अधिक गहराई वाले भूकंप आ रहे हैं.

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