उत्तराखंड – रामनगर में हो चली है जी-20 सम्मेलन की शुरुआत, आने लगे हैं विदेशी मेहमान..

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रामनगर – उत्तराखंड के लिए बहुत ही खास दिन सामने आ गया है. जिसके तहत अब रामनगर में जी-20 सम्मेलन की शुरुआत हो गई है. जिसके चलते विदेश से मेहमान भी यहां पर आने शुरू हो गए हैं. धामी सरकार कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहती है. सरकार की केवल एक ही मंशा है कि उत्तराखंड को विश्व फलक पर एक नई पहचान दिलाई जा सके. जिसके लिए वह हर संभव प्रयास कर रही है.

जानिए कौन सी विदेश और वैश्विक संस्थाएं इस में भाग लेने वाली है..

जी-20 में भारत के साथ ही जापान, रूस, अर्जेंटीना, ब्राजील, कनाडा, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, फ्रांस, जर्मनी, मेक्सिको, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया गणराज्य, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली व चीन भी शामिल है। सम्मेलन में कई वैश्विक संस्थाएं भाग लेंगी जिनमें संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन, विश्व श्रम संगठन, वित्तीय स्थिरता बोर्ड, एशियाई विकास बैंक और कनेक्शन फॉर इकोनामिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट शामिल हैं। इनके अलावा भारत के मित्र देश जैसे बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।

किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगी बातचीत..

पहला-हरित, विकास,जलवायु, वित्त और जीवन, दूसरा- त्वरित समावेशी और लचीला विकास, तीसरा- सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) पर प्रगति में तेजी लाना, चौथा- तकनीकी परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, पांचवा- 21वीं सदी के लिए बहुपक्षीय संस्थान तथा छठा- महिलाओं के नेतृत्व में विकास है।

सम्मेलन का क्या है उद्देश्य

रामनगर में आयोजित होने वाली बैठक का उद्देश्य जी-20 के सदस्य देशों के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकारों और उनके समकक्षों के साथ-साथ आमंत्रित देशों को एक साथ लाना है। इससे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित महत्वपूर्ण वैश्विक नीतिगत मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सहयोग की रूपरेखा विकसित की जा सकेगी। दरअसल, इस बैठक को केवल नई दिल्ली तक सीमित न रख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे पूरे देश में ले जाने का निर्णय लिया ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की विविधता के रंग बिखर सकें। इसी क्रम में उत्तराखंड को पहले पहल जी-20 की केवल दो बैठकें ही मिली थी लेकिन मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के अथक प्रयासों और उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष लगाव के चलते उत्तराखंड को कुल तीन बैठकें आयोजित करने का अवसर मिला।

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